उत्तर पश्चिम हवाओं के प्रभाव से इन दिनों पूरे छत्तीसगढ में कडाके की ठंड पड रहीं है। सर्द हवाओं का कहर आज भी जारी है और राज्य के सभी जिलो में इसका व्यापक असर देखा जा रहा है। लोग दिनभर गर्म कपडें में ढके रहते है और वहीं सुबह से ही चलने वाली सर्द हवाओं से लोग खासे परेशान है जिसके कारण पूरे दिन लोग गर्म कपड़ों से लदे है। ठण्ड का प्रभाव शासकीय कर्मचारी, अधिकारी एवं विद्यार्थी के उपर आसानी से देखा जा सकता है। क्योंकि उन्हे सुबह जल्दी आफिस के लिए निकलना होता है तो वहीं छोटे-छोटे मासुम बच्चों को स्कुल जाने के लिए तैयार होना पडता है। जो उनके लिए एक कष्टप्रद है।
इस समय प्रदेष में सर्द हवाओं का कहर निरंतर जारी है। बिलासपुर शहर में इस समय जिस प्रकार की ठंड पड रही है ऐसी ठंड पिछले वर्षों से नहीं पढीं थी। शीतलहर के कारण पारा दिन व दिन गिरते ही जा रहा है। जो न जाने कितनें दिनों तक बनी रहेगी जिसके कारण लोग सुबह से ही गर्म कपडें का सहारा ले रहे है। जहां रात में लोग आग जला कर ठंड से बचने का उपाय कर रहे है। और वहीं रात में गश्त लगाने वाली पुलिस भी ठण्ड कि वजह से काम चोरी कर रही है । सुबह जाने वाले अधिकारी व कर्मचारी ठंड से बचने के लिए आफिस के बाहर धूप में बैठ कर उपाय कर रहे है वहीं स्कुलों में टीचरों द्वारा बच्चों को धूप में बैठा कर क्लास ली जा रही है वहीं लोग शाम होते ही घर की ओर रुख करने लगते है।
शाम होते ही पूरे सड़क पर सन्नाटा पसर जाता है। और ठंड का असर इतना है कि चोर चोरी करके निकल जाते हैं और लोगों को पता नहीं चलता वहीं पुलिस वाले भी चैक-चैराहे में हाथ सेकते नजर आते है। प्रदेश के लगभग सभी शहर के लोग इस सर्द हवाओं के कहर का सामना कर रहे है। प्रदेष में कुछ ऐसे हिस्से भी है जहां पारा शून्य से भी नीचे जा चुका हैं। जहां के लोगो की दिनचर्या प्रभावित हो रहीं है। एवं उन्हें कई तरह कि बिमारियों का सामना भी करना पड़ रहा है। इस ठंड को वैज्ञानिक ग्लोबल वार्मिग का प्रभाव कह रहे है वहीं कई ज्योतिषों द्वारा हास्यपद तरीकों से इस ठंड के कहर को अपने पापों का नतीजा बताया जा रहा है। ज्योतिषों द्वारा कही गई बातें कहीं न कहीं प्राकृतिक संसाधनों एवं वातावरण के साथ खिलवाड़ कि और इशारा कर रही है । ग्रामिण क्षेत्रों में ठंड से मरने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है जो सरकार के काम-काज पर सवालिया निशान उठा रहे हैं । जिसको समय रहते ठीक करना सरकार के लिए एक चुनौती है। वैसे सरकार ठण्ड रोकने के लिए कर भी क्या सकती है सिवाय अलाव जलाने के...................
इतनी ठंडी अब ना भावे
पुरे दिन यह खूब सतावे
अब सूरज देवता आग बरसो
मई का रूप अब दिखलाओ ..............................
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